ऋतुएं

आता बहुत पसीना है,
ठंडा पानी पीना है,
तेज़ बड़ी धूप है,
यही गर्मी का रूप है।

सूरज को आराम है,
बादल को बस काम है,
पानी रोज़ बरसता है,
यही तो वर्षा है।

कांपता है तन थर-थर,
सब पहने हैं स्वेटर,
सोना है ओढ़ रजाई,

लो सर्दी है आई।

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