गधे के पूत यहाँ मत मूत
दिल्ली सरकार और उसके मातहद विभाग आये दिन ऐसी बेसिर पैर की घोषणाएं करते रहते हैं। कुछ दिन पहले उपराज्यपाल ने सभी दिल्लीवासियों को अपना पहचान-पत्र साथ लेकर चलने की घोषणा की। उन्हें इस जमीनी हकीकत का ग्यान नहीं हे कि दिल्ली में लाखों लोगों के पास कोइ पहचान पत्र नहीं हे। जिनके पास पहचान पत्र हे भी, वह विभागीय भ्रष्टाचार के चलते कोइ भी प्राप्त कर सकता हे। ऐसे मी पहचान पत्र किसी व्यक्ती के आतंकवादी गतिविधिओं मी शामिल होने या न होने का प्रमाण नहीं बन सकता। नयी घोषणा हे की कूडा फेंकने वालों पर जुर्माना होगा। सरकार को चाहिऐ था की वे नागरिकों से पूछें की किन-किन स्थानों पर कूडेदान उपलब्ध कराये जाएँ ताकी वे उसका इस्तेमाल कर सकें। अनधिकृत कोलोनीयों की तो बात ही छोड़ दें, डी डी ए द्वारा बनाए व बसाए गए इलाक़ों में क्या ब्लॉक स्तर पर कूडेदान की व्यवस्था हे? ज़ाहिर हे ऐसा नहीं हे। सुविधाओं के अभाव में नागरिक कूड़ा इधर-उधर फेंकने को मजबूर हैं। वैसे इस चीख-पुकार से भी कोई अंतर पड़ने वाला नहीं है। सीग्रेट पीने वालों, पैदल चलने वालों, कूडा फेंकने वालों के ऊपर जुर्माने के बाद खुले मी पेशाब करने वालों व गुटक...


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