अहंकार

''सुनो, गाड़ी बहुत गन्दी हो रही है।  इससे पूछ लेते हैं कि यह हमारी गाड़ी साफ़ कर देगा क्या?'' नेकर और टी शर्ट पहन कर पोंछे से कार साफ़ करते हुए एक आदमी को देखकर पत्नी ने कहा। मैं कार में बैठ कर उसे स्टार्ट कर चूका था, इसलिए कार को उसके पास ले जाकर रोक दिया। विंडो का काँच नीचे करते समय मैं कुछ झिझका लेकिन तभी पत्नी  ने  तेज़ आवाज़ में उस पर  सवाल दाग दिया। '' भय्या,क्या तुम हमारी कार भी रोज़ साफ कर दिया करोगे ?''
उसकी तो सांस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। आँखे लाल करते हुए बोला,'' तुम्हे क्या मैं गाड़ी साफ करने वाला लगता हूँ।'' सॉरी भाई साहब कहकर मैंने अपनी कार को आगे बढ़ा दिया। मगर दिखने में तो वह गाड़ी साफ करने वाला ही लगता था। 
एक साल बाद। 
अपनी कार में म्यूजिक बजाते हुए मैं उसे पोंछे से साफ करने में मगन था। एक व्यक्ति मेरे पास आया और पास ही खड़ी एक कार की ओर इशारा करते हुए बोला, '' ये गाड़ी भी तुम ही साफ करते हो ? हमें कहीं जाना है।''-----'' मैं तो सिर्फ अपनी गाड़ी ही साफ करता हूँ, दूसरों की नहीं।'' मैंने हँसते हुए कहा। 
वह भी मेरी हँसी में शामिल हो गया। 

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