ओशो-ध्यान के विश्वकोश
बलविन्द्र सिंह बलि से साक्षात्कार साहित्य कला परिषद द्वारा व्यवहारिक कला एवं चित्रकला में पुरस्कृत श्री बलविन्द्र सिंह बलि से चर्चा हुई। आपका सन्यास नाम स्वामी आनन्द सागर है। व्यवसायिक दृष्टि से भले ही आप पिछले पंद्रह वर्षों से कला-शिक्षक का कार्य कर रहे हैं, किन्तु स्वाभाव से कलाकार हैं। आपके बनाए चित्रों में परमेश्वर के प्रति प्रार्थना के दर्शन होते हैं। आपके जीवन और ओशो के दर्शन के प्रभाव के विषय में हुए वार्तालाप के कुछ अंश - प्रश्न:- आपका आरम्भिक जीवन कैसा था ? उत्तर:- मेरा बचपन औसत मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार में बीता। स्कूली पाठ्यक्रम में चित्रकला विषय न होते हुए भी रुचिकर लगता था। मुझे याद है, दसवीं की परीक्षा के आखरी दिन कक्षा-कक्ष की चारों दीवारों पर कोयले से अनेकों आकृतियाँ बन डाली थी। तब मेरा पसंदीदा चरित्र था- कॉमिक्स में छपने वाला टार्जन। प्रश्न:- ओशो के साहित्य से परिचय किस प्रकार हुआ ? उत्तर:- मेरे मोहल्ले में एक सामुदायिक लाइब्रेरी थी। ओशो की पुस्तक कुछ देर पढता, और चुपचाप बैठा रहता। ओशो के शब्द घंटों मन में मंडराते रहते। प्रश्न:- अपने सन्यास के विषय में कु...