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Showing posts from June, 2016

ओशो-ध्यान के विश्वकोश

बलविन्द्र सिंह बलि से साक्षात्कार साहित्य कला परिषद द्वारा व्यवहारिक कला एवं  चित्रकला में पुरस्कृत श्री बलविन्द्र सिंह बलि से चर्चा हुई। आपका सन्यास नाम स्वामी आनन्द सागर है। व्यवसायिक दृष्टि से भले ही आप पिछले पंद्रह वर्षों से कला-शिक्षक का कार्य कर रहे हैं, किन्तु स्वाभाव से कलाकार हैं। आपके बनाए चित्रों में परमेश्वर के प्रति प्रार्थना के दर्शन होते हैं। आपके जीवन और ओशो के दर्शन के प्रभाव के विषय में हुए वार्तालाप के कुछ अंश - प्रश्न:- आपका आरम्भिक जीवन कैसा था ? उत्तर:- मेरा बचपन औसत मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार में बीता। स्कूली पाठ्यक्रम में चित्रकला विषय न होते हुए भी रुचिकर लगता था। मुझे याद है, दसवीं की परीक्षा के आखरी दिन कक्षा-कक्ष की चारों दीवारों पर कोयले से अनेकों आकृतियाँ बन डाली थी। तब मेरा पसंदीदा चरित्र था- कॉमिक्स में छपने वाला टार्जन। प्रश्न:- ओशो के साहित्य से परिचय किस प्रकार हुआ ? उत्तर:- मेरे मोहल्ले में एक सामुदायिक लाइब्रेरी थी। ओशो की पुस्तक कुछ देर पढता, और चुपचाप बैठा रहता। ओशो के शब्द घंटों मन में मंडराते रहते। प्रश्न:- अपने सन्यास के विषय में कु...

बरसाना की रंग-रसीली होली

 घास के  हरे मैदान और छोटी पहाड़ियों के बीच बसा है कन्हैया के पिता नन्द बाबा का गाँव - नंदगांव। कन्हैया तो भोर होने से पूर्व ही गायों को चराने के लिए मैदान में ले जाते हैं। उनकी बंसी की धुन सुन अन्य ग्वाले भी तुरन्त चल पड़ते हैं। किन्तु आज तो कान्हा की बंसी कुछ अजीब स्वर में बज रही है। इसकी धुन में नृत्य की लपट और आनंद की लहर है। सभी ग्वाले आनन-फानन में इस धुन की डोर पकड़ कान्हा तक पहुंचे। देखते क्या हैं - कान्हा ऑंखें मूंदे मुरली बजने में मगन हैं। उनके पीले वस्त्र वसंत की बयार से लहरा रहे हैं। पास ही राधा भाव विभोर होकर नृत्य कर रही है। राधा का नृत्य ऐसा ही है जैसे मंद पवन के झोंकों से लताएं झूल रहीं हों। मंत्रमुग्ध से ग्वाले भी नृत्य करने लगे। उनको सुधि तब आई जब कृष्ण के अधरों से संगीत झरना बंद हुआ। उन्हें ज्ञात हो गया था कि शीघ्र ही उन्हें बरसाना गाँव से होली खेलने का निमंत्रण मिलने वाला है। ऐसा भाव आते ही वे हर्षित होकर गाने लगे।  आज बिरज में  होरी रे रसिया, होरी रे रसिया बरजोरी रे रसिया  अपने मंदिरवा सों निकलो, कोई श्यामल कोई गोरी रे रसिया  आज बिरज ...

अहंकार

''सुनो, गाड़ी बहुत गन्दी हो रही है।  इससे पूछ लेते हैं कि यह हमारी गाड़ी साफ़ कर देगा क्या?'' नेकर और टी शर्ट पहन कर पोंछे से कार साफ़ करते हुए एक आदमी को देखकर पत्नी ने कहा। मैं कार में बैठ कर उसे स्टार्ट कर चूका था, इसलिए कार को उसके पास ले जाकर रोक दिया। विंडो का काँच नीचे करते समय मैं कुछ झिझका लेकिन तभी पत्नी  ने  तेज़ आवाज़ में उस पर  सवाल दाग दिया। '' भय्या,क्या तुम हमारी कार भी रोज़ साफ कर दिया करोगे ?'' उसकी तो सांस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। आँखे लाल करते हुए बोला,'' तुम्हे क्या मैं गाड़ी साफ करने वाला लगता हूँ।'' सॉरी भाई साहब कहकर मैंने अपनी कार को आगे बढ़ा दिया। मगर दिखने में तो वह गाड़ी साफ करने वाला ही लगता था।  एक साल बाद।  अपनी कार में म्यूजिक बजाते हुए मैं उसे पोंछे से साफ करने में मगन था। एक व्यक्ति मेरे पास आया और पास ही खड़ी एक कार की ओर इशारा करते हुए बोला, '' ये गाड़ी भी तुम ही साफ करते हो ? हमें कहीं जाना है।''-----'' मैं तो सिर्फ अपनी गाड़ी ही साफ करता हूँ, दूसरों की नहीं।'' मैंने हँस...

आओ झूलें

आओ मिलकर झूला झूलें। आओ आज पढ़ाई भूलें। ऊपर - नीचे , नीचे - ऊपर , चक्कर , गोलाई में घूमें। ऊपर नील गगन को चूमें। नीचे की मिटटी को छू लें। पेड़ों की छांवों में झूमें। आओ अपना बचपन जी लें।

मकई के चिकली चकई के मिकली

मकई के चिकली चकई के मिकली सज - धज कर के निकली मछली शादी में जाने को मचली चींटी बोली , '' सुन री मछली ... मत जाओ तुम ओ हकली। '' मकई के चिकली चकई के मिकली बाल खोल कर चींटी चली मकड़ी बोली , '' यदि हवा चली ... बाल तुम्हारे हैं नकली उड़ जायेंगे ऐ टकली। '' मकई के चिकली चकई के मिकली मकड़ी अकड़ी आगे बढ़ी दुल्हन तो मक्खी निकली चरों तरफ़ मची भगदड़ भागो   मकड़ी है असली मकई के चिकली चकई के मिकली

मेरी माँ

सबसे पहले मैं जो बोला , वह शब्द था माँ - उठकर चलना सिखाया जिसने , वह है मेरी माँ। सबसे ज्यादा प्यार है करती , मुझसे मेरी माँ। डांटती है पर फ़िर भी अच्छी , लगती मेरी माँ। सच्चाई का सबक सिखाती , वह है मेरी माँ। आओ आकर गले लगाओ , मुझको मेरी माँ। मेरी माँ जैसी ही प्यारी , होती होंगी सबकी माँ।

चंदामामा

चंदा के मामा होने की , बात हुई है पुरानी। चंदा पर जाकर सैर करने की , मैंने मन में ठानी। अब तो चंदा बहुत पास है , सुन लो मेरी जबानी। धरती वालों ने ढूंढ़ लिया है , अन्तरिक्ष में पानी।

गरीब

हाँ गरीब लोग हैं होते , जिनके पास पैसे नहीं होते। झाड़ू - पोचा , बर्तन धोते , स्टेशन पर वे बोझा ढोते , या सड़कों पर झाड़ू देते। घर , ऑफिस में और स्कूल में , और सभी जगह पर होते। काम से इनके हमें आराम , पर हम इनको थेंक यू नहीं कहते , जिनके पास पैसे नहीं होते , क्यों   नहीं उनको हम थेंक यू कहते ?

बछिया

गाय ने जब आवाज़ लगाई , दौड़ी - दौड़ी बछिया आई। गाय ने उसको प्यार से चाटा , बछिया ने फ़िर थन को काटा। पिया दूध फिर पेट भर , सीधा सादा जानवर।

दूध

दूध है माँ का प्यार , दूध है शक्ति का भंडार। चुस्ती - फुर्ती देने वाला , हड्डियों को बल देने वाला। कद बढ़ाने वाला। दूध में भरे गुण हज़ार , पियेंगे हम बार - बार।

मच्छर

सोते हम जब बेखबर , एक छोटा सा मच्छर , उड़ गया देखो काटकर। यह है हमारा दुश्मन , यह है ज्वर का कारण , इसे भगाओ करो उपाय , मच्छर हमें काटने न पाए।

झूलेमैयाँ

मैं पापा और मम्मी , मेले में एक झूले में , झूल रहे थे। झूला ऊपर जाता था - बड़ा मज़ा आता था। झूला नीचे आता था - दिल धक् से रह जाता था। मैं पापा और मम्मी , मेले में एक झूले में , झूल रहे थे। झूला आगे जाता था - मैं पीछे जाता था , झूला पीछे जाता था - मैं घबरा जाता था। मैं पापा और मम्मी - मेले में एक झूले में , झूल रहे थे। गोल घूमा जैसे झूला , शुरू हो गई चिल्लम - चिल्ला। बड़ा मज़ा आता था। मैं पापा और मम्मी - मेले में एक झूले में , झूल रहे थे।