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ऋतुएं

आता बहुत पसीना है , ठंडा पानी पीना है , तेज़ बड़ी धूप है , यही गर्मी का रूप है। सूरज को आराम है , बादल को बस काम है , पानी रोज़ बरसता है , यही तो वर्षा है। कांपता है तन थर - थर , सब पहने हैं स्वेटर , सोना है ओढ़ रजाई , लो सर्दी है आई।

हँसी आई रे

हा - हा   ही - ही छाई   रे - हंसी   आई   रे।   भइया ने जब गाना गाया , सुर और ताल समझ न आया , सुनकर   एसा   बेसुरा   गाना - हा - हा   ही - ही   छाई   रे - हंसी   आई   रे।   ढून्ढ   रही   है   कब   से   मुन्नी - कहाँ   छुपी   है   मेरी   मम्मी ? सूरत   नज़र   आई   रे -  मुन्नी   मुस्कुराई   रे। हा - हा   ही - ही   छाई   रे - हंसी   आई रे।   पापा नाचे झूमकर , मम्मी के ऊपर घूमकर , पापा गिर पड़े। हा - हा ही - ही छाई रे। हँसी आई रे।

सर्कस

कलाकारों के बदन लचीले , खूब घुमाते सर्कस में। कारनामे अजब - गजब से , पशु दिखाते सर्कस में। हाथी - घोड़े , बन्दर - भालू , बहुत   हँसाते   सर्कस में। मन करता है देख के इनको , हम भी जाते सर्कस में।

नींद

खोए हैं सारे आकार , तम में डूबा है संसार। जगमग - जगमग कहते तारे , जा बिस्तर में सो जा रे। नींद है सपनों का भंडार , उठ कर इन्हे करना साकार। दिन भर देह करती है काम , नींद उसे देती विश्राम।

फीका बचपन

चाक लेट और टॉफी के बिन , फीका है मेरा बचपन। पेट भरा है लेकिन , खाने को करता है मन। दोस्तों में बांटू गिन - गिन , अपने लिए रख लूँ चुन - चुन। पापा कहते मुझसे छीन - दांतों में घिसो मंजन। दांतों को देती है   सड़न , फ़िर भी है ये मुझे पसंद। चाकलेट और टॉफी के बिन , फीका है मेरा बचपन।

शेर

तेरे प्यार के इकरारनामे पर , अपने दिल के लहू से ,  किये हैं दस्तखत  मैंने.  शुक्र है की मौत की आगोश में हूँ , वरना तुम्हें इतना प्यारा न होता .  इससे पहले की ग़म के बदल ,  रौशन घर में अँधेरा करते , आहट ने तेरी - चिराग - ए - मुहब्बत जला दिया .   हुआ नहीं दीदार - ए - यार फिर भी , पथराई   नहीं हैं आँखें , उनकी   राह   तकते - तकते . उनके आने से सितम , बढ़ जाते हैं इस कदर - की वो देखते तो हैं मगर बात नहीं करते . स्याह रातों में अपने ही बदन को छूकर - मैं समझ लेता हूँ   कि   उनसे मुलाकात हो गयी .  तेरे जलवे ही हैं साकी   जो रोक लेते हैं मुझको - वरना तेरे मैखाने से - जाना चाहता है जिंदा कौन ?    ये गुलों की खुशबू लग रही बड़ी भली है। सांसों में बस जाने दो इसको शाम अभी तो ढली है ठहरो सारी रात है बाकी बात अभी तो चली है।

कॉमिक्स कार्य शाला सी एस डी एस

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