बालश्रम
नन्हें कोमल इन हाथों में-
सुन्दर प्यारे खिलौने होते,
होते नहीं, खुरदरे औज़ार।
गोल,गुदगुदी,गुलाबी हथेली-
कालिख से मैली ना होती,
ना सुननी पड़ती फटकार।
पथराई सी इन आँखों में-
मीठे-मीठे सपने होते,
दबी ना होती, आंसू की बौछार।
सुन्दर प्यारे खिलौने होते,
होते नहीं, खुरदरे औज़ार।
गोल,गुदगुदी,गुलाबी हथेली-
कालिख से मैली ना होती,
ना सुननी पड़ती फटकार।
पथराई सी इन आँखों में-
मीठे-मीठे सपने होते,
दबी ना होती, आंसू की बौछार।
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