अभी- अभी मेरे दिल में ख्याल आया है

किसी सूरत मेरे बच्चों की जरुरत पूरी हो जाएँ,
इसी कारण दिन-रात काम करता हूँ मैं।

हज़ार मुश्किलों के बोझ को अपने सीने में छुपाये,
चैन की न सही, मगर नींद में रहता हूँ मैं।

देखकर सामने अपने बे-ईमानी की बातें,
कहना चाहता हूँ , मगर डरता हूँ मैं।

हज़ार वर्षों से सीखा है की एक अवतार आयेगा,
इसलिए कुछ और नहीं, बस दुआ करता हूँ मैं।

आज उसकी बात और जज़्बात सुनकर,
अपने को जवां महसूस करता हूँ मैं।

अभी-अभी मेरे खून में उबाल आया है,
अकेले में लेकिन अब भी फिसलता हूँ मैं।

आज़ादी के जश्न का जोश इन्कलाब बन गया,
स्याह कैसे सफ़ेद होगा सोचा करता हूँ मैं।

भ्रष्ट से है त्रस्त अपना लोकतंत्र,
देखिये कितने वक़्त में बदलता हूँ मैं।

ये आक्रोश, ये शोर, ये झंडे, ये नारे,
आदमी आम हूँ पर, देश की फिकर करता हूँ मैं।

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