न जाने क्यों

न जाने क्यों आज अचानक हिचकी आने लगी। अब रोके नही रूक रही।

क्यों चांद है आज उदास तू,
कल तुझको देखा प्यार किया ,
प्रियतम जैसा सम्मान दिया ,
आज नहीं क्यों आती हैं ,
अपना सौंदर्य छिपाती हैं ,
इसलिए हृदय में भरी हुयी है आज व्यथा।
पंचम चौथ से भले बड़ा ,
लेकिन दुःख के सागर में गडा ,
जारी ....

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